you and your social world in hindi
आप और आपकी सामाजिक दुनिय
आप अगर आप अपने आंतरिक मन के बारे में एक विस्तृत वर्णन लिखें और फिर अपने सबसे अच्छे दोस्त से आपके बारे में विवरण लिखने को कहें , तो आपके विचार में वे दोनों विवरण किस हद तक समान होंगे ? यदि आप अपने किसी भाई - बहन से लिखवाएं तो क्या अंतर होंगे ? किसी अभिभावक से लिखवाने पर ? किसी नए परिचित के बारे में क्या विचार है ? पूरी संभावनाएं हैं कि उनमें से कोई भी विवरण आपके विवरण के लगभग समान नहीं होंगे । ऐसा इसलिए क्योंकि कोई भी आपको उस तरह नहीं देखता जैसे आप खुद को देखते हैं । ऐसा इसलिए भी है क्योंकि कदाचित आप इन सभी लोगों की तुलना में कुछ भिन्न तरह से कार्य करते हैं ।
पहचान ( Identity )
दुनिया के सामने हम खुद को जिस तरह प्रस्तुत करने का विकल्प चुनते हैं , वह हमारी पहचान बनाता है । हमारी पहचान , हमारा सार्वजनिक रूप होता है । पहचान जटिल होती है और जीवनपर्यन्त टुकड़ों - टुकड़ों में विकसित होती है । नए लोगों , स्थानों , विचारों और चुनौतियों से रूबरू होने के साथ आपकी पहचान समय बीतने के साथ बदल सकती है ।
यद्यपि हर व्यक्ति की पहचान जटिल होती है , लेकिन अधिकांश मनोवैज्ञानिक इस पर सहमत हैं कि यह तीन प्रमुख तत्वों से बनी होती है : व्यक्तिगत पहचान , संबंधपरक पहचान और सामूहिक पहचान । आप द्वारा अपनी व्यक्तिगत , संबंध परक और सामूहिक पहचानों को सार्थक ढंग से एकरूप करने के साथ आपकी पहचान साकार होती है ।
व्यक्तिगत पहचान ( Personal identification )
आपकी व्यक्तिगत पहचान , उन निजी विशेषताओं से बनी होती है जो आपको दूसरों से अलग करती हैं । ये गुण शारीरिक , जैसे कि आपकी दिखावट और संपत्तियां , और मनोवैज्ञानिक
जैसे कि आपका व्यक्तित्व और प्रतिभाएं दोनों ही तरह के हो सकते हैं । व्यक्तिगत पहचान के महत्वपूर्ण तत्व निम्न हैं :
• नाम दिया गया नाम , उपनाम )
• आयु
• लिंग
• शारीरिक विशेषताएं ( लम्बा , नाटा , फिट , लाल बालों वाला , इत्यादि )
• संपत्तियां ( घर , कार , कपड़े , इत्यादि )
• दूसरों से व्यवहार करने का तरीका ( संकोची , मिलनसार , विनम्र , इत्यादि
• प्रतिभाएं और निजी गुण ( बुद्धिमान , रचनात्मक , एथलेटिक , इत्यादि )
• पसंद और वरीयताएं ( खाना , संगीत , शौक , इत्यादि )
•भावनाएं ( खुश , दुखी , मूडी , धीर - गंभीर , रोमांचप्रिय , इत्यादि )
• विश्वास और आदर्श ( पर्यावरणवादी , रूढ़िवादी ,
इत्यादि )
• बौद्धिक रुचियां ( साहित्य , विज्ञान , इत्यादि )
• कलात्मक गतिविधियां ( चित्रकारी , गायन , नृत्य , इत्यादि )
संबंधपरक पहचान ( Relational Identity )
चपूर्ण संबंधपरक पहचान का अर्थ यह है कि हम अपने जीवन में महत्वपूर्ण लोगों जैसे कि हमारे माता - पिता , भाई - बहन , निकट मित्रों , बच्चों , और रोमांटिक पार्टनर के संबंध में खुद को किस तरह देखते हैं । ये महत्वपूर्ण दूसरे लोग हमारी खुद की अनुभूति के लिए इतने अधिक महत्वपूर्ण होते हैं कि प्रायः उनकी उपलब्धियों पर हमें इस तरह गर्व होता है जैसे कि वे हमारी अपनी हों । संबंधपरक पहचान के महत्वपूर्ण तत्व निम्न हैं :
• नातेदारी / पारिवारिक भूमिका ( माता , पिता , पुत्र , पुत्री , इत्यादि )
• रोमांटिक / यौन भूमिका
• पेशेवर भूमिका ( बॉस , कर्मचारी , इत्यादि )
• मित्रता की भूमिका ( सहकर्मी , सर्वश्रेष्ठ मित्र , परिचित , इत्यादि )
सामूहिक पहचान ( collective identity )
हमारी सामूहिक पहचान , हमारे द्वारा निभाई जाने वाली सभी सामाजिक भूमिकाओं और हमसे संबंधित सभी सामाजिक समूहों का कुल योग होती है । मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और हममें से हर कोई , अनेक समूहों जैसे कि सांस्कृतिक समूह , जातीय समूह , और धार्मिक समूह आदि का अंग होता है । संस्कृति और जातीयता , पहचान को विशेष रूप से प्रभावित करते हैं । इस बारे में विचार करें कि अगर आप किसी अन्य देश में बड़े हुए होते या किसी अन्य जातीय समूह में पैदा हुए होते तो क्या तब भी आप ' वही ' होते जो आज हैं?
देखें कि किस तरह से आपकी सामूहिक पहचान के निम्न तत्व , आपको वह बनाते हैं जो आप आज हैं :
• नस्ल / जातीयता
• धर्म
• संस्कृति ( यूरोपीय , एशियाई , इत्यादि )
• सामाजिक वर्ग या दर्जा ( मध्य वर्ग , कार्यशील वर्ग , इत्यादि )
• व्यवसाय
• नागरिकता / प्रांतीयता ( अमेरिकी , कैलिफोर्नियाई , इत्यादि )
• समूह की सदस्यता ( विद्यार्थियों के आर्केस्ट्रा दल का सदस्य , इत्यादि )
• राजनैतिक जुड़ाव ( डेमोक्रेट , रिपब्लिकन , ग्रीन , इत्यादि )
संस्कृति और पहचान ( Culture and identity )
संस्कृति , पहचान पर काफी असर डालती है । संस्कृति में किसी बड़े सामाजिक समूह के साझा व्यवहार , विचार , दृष्टिकोण और परंपराएं शामिल होते हैं जो एक पीढ़ी से अगली को हस्तांतरित होते हैं । प्रत्येक संस्कृति के मूल्य , नैतिकता , विश्वास , जीवनशैलियां , तथा स्वीकार्य व अस्वीकार्य व्यवहार के मानदंड , जैसे कि पहनावे का तरीका , खुद को व्यक्त करने और दूसरों से संबंध बनाने के तरीके आदि अलग - अलग होते हैं । शिक्षा से लेकर आजीविका और परिवार तक जीवन के सभी पहलुओं को संस्कृति प्रभावित करती है ।
पश्चिमी संस्कृति प्रायः व्यक्तिवाद को बढ़ावा देती है । इसका अर्थ है कि लोग समूह के लक्ष्यों के बजाय व्यक्तिगत लक्ष्यों को अधिक महत्व देते हैं और सामूहिक गुणों के बजाय निजी संदर्भों में अपनी पहचान तय करते हैं । व्यक्तिवादी संस्कृतियों में , लोग दूसरों से प्रतिस्पर्धा करने तथा अपने आस - पास के अन्य लोगों से खुद को अलग साबित करने पर जोर देते हैं । इस कारण से , अमेरिका और कनाडा जैसे देशों के लोग प्रायः अपनी सामूहिक या संबंधपरक संस्कृति के मुकाबले अपनी निजी संस्कृति को अधिक महत्व देते हैं । व्यक्तिवादी संस्कृतियों में लोगों के लिए महत्वपूर्ण अन्य मूल्यों में निम्न शामिल हैं :
• आनंद
• रचनाशीलता और कल्पनाशीलता
• चुनौतियों , नएपन और बदलावों से भरी विविधतापूर्ण जिंदगी
• बहादुर , रोमांचप्रिय और जोखिम उठाने वाला होना
• विचारों और कार्यों की स्वतंत्रता
• स्वतंत्रता , आत्म - निर्भरता और अपने लक्ष्यों का चुनाव करना


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