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इतनी शक्ती हमें देना दाता ( Give us so much strength )

  इतनी शक्ती हमें देना दाता  इतनी शक्ती हमें देना दाता  इतनी शक्ती हमें देना दाता ,  Sandeep Kumar मनका विश्वास कमजोर होना ,  हम चले नेक रस्तेपे हमसे ,  भूलकर भी कोई भूल होना ।धृ ।  दूर अज्ञान के हो अंधेरे  तू हमें ज्ञान की रोशनी दे  हर बुराई से बचते रहे हम  जितनी भी दे भली जिंदगी दे  बैर होना किसीका किसीसे  भावना मन में बदलेकी होना ॥१ ॥  हम ना सोचे हमें क्या मिला है  हम ये सोचे किया क्या है अर्पण  फूल खुशियोंके बॉटे सभीको  सब का जीवन ही बन जाये मधुबन  अपनी करुना का जलं तू बहाके  कर दे पावन हर एक मन का कोना । २ । Sandeep Kumar Youtube visit

Jhansi ki rani poem in hindi


" रानी झाँसी की "

हिन्दी शायरी





सिंहासन हिल उठे , राजवंशों ने भृकुटी तानी थी ,

 बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी , 

गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी ,

 दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी



चमक उठी सन् सत्तावन में 

वह तलवार पुरानी थी । 

बुंदेले हरबोलों के मुँह

 हमने सुनी कहानी थी ।

 खूब लड़ी मर्दानी वह तो 

झाँसी वाली रानी थी ।। थी ।


 

कानपुर के नाना की मुँहबोली बहन ' छबीली ' थी ,

 लक्ष्मीबाई नाम , पिता की वह संतान अकेली थी , 

नाना के संग पढ़ती थी वह , नाना के संग खेली थी , 

बरछी , ढाल , कृपाण , कटारी उसकी यही सहेली थी ,



वीर शिवाजी की गाथाएँ

 उसको याद ज बानी थी । 

बुदेले हरबोलों के मुँह 

 हमने सुनी कहानी थी । 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो 

झाँसी वाली रानी थी ।।



लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार , 

देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों की वार

 नकली युद्ध , व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार ,

 सैन्य घेरना , दुर्ग तोड़ना , ये थे उसके प्रिय खिलवाड़ ,



महाराष्ट्र - कुल - देवी उसकी 

भी आराध्य भवानी थी ।

 बुंदेले हरबोलों के मुँह 

हमने सुनी कहानी थी । 

ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो

 झाँसी वाली रानी थी ।। 



हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में , 

व्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में , 

राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में , 

सुभट बुंदेलों की विरुदावलि - सी वह आई झाँसी में ,



चित्रा ने अर्जुन को पाया 

शिव से मिली भवानी थी । 

बुंदेले हरबोलों के मुँह

 हमने सुनी कहानी थी । 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो 

झाँसी वाली रानी थी ।




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