About The Dialogue
बातचीत के बारे में अवलोकन
संवाद वास्तव में क्या होता है ? संवाद संदेश देने या आदान - प्रदान करने की प्रक्रिया है । प्रदेश विचार या अहसास की अभिव्यक्ति होता है । संदेश शब्दों के रूप में हो सकते । हैं , किन्तु वे ध्वनियों , मुद्राओं ( भाव - भंगिमाओं ) , क्रियाओं , या चेहरे के हाव - भावों के रूप में भी हो सकते हैं ।
उदाहरण के लिए एक उठी हुई भौंह , एक जम्हाई या एक चीख , एक संदेश है । संदेश , संगीत , डांस दृश्य कला , अभिनय , या किसी अन्य प्रकार से अभिव्यक्त किये जा सकते हैं ।
लोग अनेक कारणों से संवाद करते हैं : तथ्य और विचार बताने के लिए , अहसास साझा करने के लिए , आदेश देने के लिए राजी करने के लिए , मनोरंजन के लिए और धोखा देने के लिए भी । हालांकि लोगों के बीच संबंध बनाना और बरकरार रखना , संवाद का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है ।
आप संवाद के माध्यम से लोगों को जान पाते हैं , चाहे यह आमने - सामने हो , फोन पर हो , या अनेक ऑनलाइन सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से हो । संवाद के माध्यम से आप अपने मौजूदा रिश्तों को भी आगे बढ़ाते हैं । जब लोग एक - दूसरे से बात करने से कतराने लगें या महसूस करने लगें कि उनके पास कहने को कुछ भी नहीं बचा है , तो यह उनके रिश्ते के संकट में होने का निश्चित संकेत होता है ।
बेहतरीन संवाद कुशल लोगों के रिश्ते सबसे खुशियों भरे होते हैं । उनकी मित्रताएं , प्रेम संबंध और पारिवारिक संबंध ज्यादा मजबूत होते हैं और सहकर्मियों से बेहतर तालमेल कायम करते हैं । अच्छी संवाद कुशलता होने से आप एक पसंदीदा कर्मचारी भी बनते हैं ।
रोजगार देने वाले सदैव ऐसे कर्मचारियों की तलाश में रहते हैं जिनमें अच्छी संवाद कुशलता हो और ऐसी कुशलताएं हों जो अच्छे संवाद पर निर्भर होती हैं , जैसे कि टीमकार्य की कुशलता , नेतृत्व की कुशलता , और जनसंपर्क की कुशलता ।
आपसी संवाद
चार बुनियादी संवाद कुशलताएं होती हैं : लिखना , पढ़ना , बोलना और सुनना । इस अध्याय में हम बोलने और सुनने पर केंद्रित होंगे , जो कि आपसी संवाद में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली कुशलताएं हैं ।
अंतरवैयक्तिक ( आपसी ) संवाद एक से दूसरे व्यक्ति का प्रायः आमने - सामने का संवाद होता है । आपसी संवाद आमतौर से सहज और घनिष्ठ होता है । यह बात इसे संवाद के अन्य स्वरूपों से काफी अलग बनाती है , जैसे कि लिखकर संवाद करना , सार्वजनिक भाषण ,
और मास ( मीडिया ) संवाद ।
हर बार अन्य व्यक्ति से आपसी व्यवहार करते समय आप उससे आपसी संवाद करते हैं । चाहे आप शब्दों का इस्तेमाल न करें , लेकिन आपके शरीर के हाव - भाव आपके विचारों और अहसासों के बारे में बहुत कुछ बता देते हैं । वास्तव में , आपकी शारीरिक भाषा , तब भी संदेश भेजती है जब आपको इसका पता नहीं होता ।
हममें से ज्यादातर लोग अपने दिन का एक बड़ा भाग बात करने , और दूसरे लोगों की बात सुनने में बिताते हैं । हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि हम बहुत अच्छे संवाद कुशल हैं । संवाद करने के लिए अनेक कुशलताएं चाहिए होती हैं - आत्म - जागरूकता , सांस्कृतिक जागरूकता , ईमानदारी , दूसरों के प्रति सम्मान और हमदर्दी , और अन्य दृष्टिकोणों के प्रति उदारता ।
संवाद के तत्व
संवाद एक प्रक्रिया है , जिसमें दोनों ओर से विचारों और अहसासों का लेन - देन ( विनिमय ) किया जाता है । यह प्रक्रिया उससे अधिक जटिल है जितना हम इसे समझते हैं । हर विनिमय के छह विभिन्न तत्व होते हैं : प्रेषक , संदेश , चैनल , ग्राही , प्रतिक्रिया और संदर्भ । आइए इनमें से प्रत्येक को देखें ।
प्रेषक
प्रेषक वह व्यक्ति होता है जो किसी विचार या अहसान को एक संदेश में बदलता है
और फिर यह संदेश अन्य व्यक्ति को भेजता है । प्रेषक कोई लेखक , वक्ता , या शारीरिक हाव - भाव के जरिए
अमौखिक ( शब्दरहित ) संदेश भेजने वाला व्यक्ति हो सकता है ।
संदेश
प्रेषक के विचार या अहसास की अभिव्यक्ति , संदेश होता है । यह लिखा हुआ , बोला हुआ या अमौखिक हो सकता है । माना कि आप और आपका कोई मित्र एक पार्टी में गए हैं , और आप वापस जाने के लिए तैयार हैं । आप अनेक तरह से यह संदेश भेज सकते हैं : " आओ चलें " कहकर , आपके स्मार्टफोन पर एक छोटा संदेश टाइप करके , निकास की ओर इशारा करके , या अपने मित्र को दरवाजे की ओर धकेलते हुए भी ।
चैनल
चैनल वह माध्यम होता है जिसमें कोई संदेश दिया जाता है । दिए जा रहे संदेश पर चैनल का बहुत असर पड़ता है । माना कि आपके बॉस ने आपके लिए एक वॉयसमेल छोड़ी है जिसमें आपसे आग्रह किया है कि आप उसके ऑफिस में एक प्रोजेक्ट पर चर्चा करने के लिए पहुंचें ।
सोचें कि यह संदेश कितने भिन्न प्रकार से आ सकता है यदि उसने इसे औपचारिक ज्ञापन के रूप में तैयार किया हो या आपके घर पर आपको सुखद रूप से चकित करने के लिए एक सिंगिंग टेलीग्राम की सेवा ली हो ।
संदर्भ
संवाद का समय और स्थान , संदर्भ कहलाता है । चैनल की तरह संदर्भ का भी संवाद प्रक्रिया पर बड़ा प्रभाव पड़ता है । माना कि आप अपने अनुदेशक के ऑफिस में पद में संभावित बदलाव पर चर्चा कर रहे हैं ।
यह बातचीत किस तरह से भिन्न होगी यदि यह किसी भीड़ - भरी पार्टी में की जाए . किसी अंत्येष्टि संस्कार के समय की जाए , या ऐसी कक्षा में की जाए जहां आपके सभी साथी छात्र सुन रहे हों ? क्या आप वही बातें कहेंगे ?
क्या आप वही प्रतिक्रियाएं देंगे ? संदर्भ के प्रति सजग रहने से आपको सही शब्द चुनने , तथा सामने वाले की प्रतिक्रियाओं का पूर्वानुमान करने में मदद मिलती है ।
संवाद टूटना
ग्राही द्वारा संदेश को प्रेषक के इच्छित तरीके से समझा जाना संवाद का लक्ष्य होता है । यह लक्ष्य बहुत सरल लगता है , लेकिन इसे हासिल करना सदैव सरल नहीं होता । संवाद प्रक्रिया जटिल होती है , और आसानी से गलतफहमियां बन सकती हैं ।
क्या आपने तब कभी ' हां ' सुना है जब सामने वाला ' ना ' कहने के लिए तत्पर हो ? क्या कभी आपने अपनी किसी बिना गलत इरादे वाली टिप्पणी के बाद सामने वाले को गलत तरह से समझते देखा है ?
हममें से हर किसी के अनुभव , लक्ष्य , अपेक्षाएं , विचार , दृष्टिकोण , अहसास और मनोदशाएं ( मूड ) अलग - अलग होते हैं और ये अच्छे संवाद में रुकावटें खड़ी कर सकते हैं ।
समझ के रास्ते में शारीरिक ( भौतिक ) , भावनात्मक या सांस्कृतिक रुकावटें आड़े आने पर संवाद टूट जाता है ।
प्रतिक्रिया
संदेश पर ग्राही की प्रतिक्रिया प्रतिक्रिया कहलाती है । ग्राही ने संदेश को किस तरह समझा है , यह जानने के लिए प्रेषक प्रतिक्रिया पर निर्भर रहता है । प्रतिक्रिया कई प्रकार का हो सकता है - सहमति , असहमति , प्रश्न , असमंजस , क्रोध , प्रसन्नता । यह शब्दों के रूप में ( " मैं देखता हू " ) , अभिव्यक्तियों ( " ओह , हां । " ) . या क्रियाओं ( सिर हिलाना , मुस्कराना , चले जाना ) सफलता के रूप में हो सकता है । विरोधाभासी भावनाएं भी संवाद पर असर डाल सकती हैं हमारे शब्द , हमारे विचारों को व्यक्त करते हैं ,
इसलिए दुविधापूर्ण विचारों से असमंजसपूर्ण ( और असमंजस में डालने वाले ) संदेश उत्पन्न होते हैं । उदाहरण के लिए , अगर किसी व्यक्ति को लेकर आपके अहसास विरोधाभासी हों , तो आप स्पष्ट संदेश देने में सक्षम नहीं होंगे ।
आप हकला सकते हैं , हिचकिचा सकते हैं , या ऐसा कुछ कह सकते हैं जिसका कोई अर्थ न हो । प्रत्येक वार्तालाप से वक्ताओं और श्रोताओं की भावनाएं जुड़ जाती हैं , जिससे दोनों पक्षों में गलतफहमियां उत्पन्न हो सकती है ।
उदाहरण के लिए , यदि आप अपने सर्वश्रेष्ठ मित्र पर अत्यधिक क्रोधित हों , तो आपके लिए सही शब्द चुनना या सुसंगत वाक्य बोलना कठिन हो सकता है ।
आप उसके शब्दों की विकृत तरीके से व्याख्या कर सकते हैं या चयनात्मक ढंग से सुन सकते हैं , जिसका अर्थ है कि आप तय कर लेते हैं कि क्या सुनना है , और बाकी बातों की अनदेखी कर देते हैं । लोग प्रायः संदेश का वह भाग रोकने के लिए सुनने का चयनात्मक तरीका इस्तेमाल करते हैं जो उनकी आत्म - प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाता हो ।



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