संदीपन और प्रेरणा शायरी
प्रेरणा
आज़ाद हैं तोह आसमान छु ही आएंगे ज़िंदा है
तो हर जंग जीत जायेंगे साथ हैं हम तो दुनिया को दिखा आएंगे
तिरंगे के तीन रंगों में देश को समा जायेंगे ।
ज्ञान की बात
हर रिश्ते में विश्वास रहने दो ;
जुबान पर हर वक़्त मिठास रहने दो ;
यही तो अंदाज़ है जिंदगी जीने का ;
न खुद रहो उदास , न दूसरों को रहने दो .. !
संदीपन
छू ले आसमान ज़मीन की तलाश ना कर ,
जी ले ज़िंदगी खुशी की तलाश ना कर ,
तकदीर बदल जाएगी खुद ही मेरे दोस्त मुस्कुराना सीख ले वजह
की तलाश ना कर ।
संदेश
कोन जाने कब मौत का पैगाम आ जाए ,
जिंदगी की आखरी शाम आ जाए ,
हमे तो इंतजार है उस शाम का जब हमारी ज़िंदगी किसी के काम आ जाए ....
सहारा
ज़िंदगी में बार बार सहारा नही मिलता ,
बार बार कोई प्यार से प्यारा नही मिलता ,
है जो पास उसे संभाल के रखना ,
खो कर वो फिर कभी दुबारा नही मिलता ...
कर्म
कर्म तेरे अच्छे हे तो किस्मत तेरी दासी है !
नियत तेरी अच्छी है तो घर तेरा मथुरा कशी है !
" क्या लिखूं "
ज़िक्र भी करदूं ' मोदी ' का तो खाता हूँ
गालियां अब आप ही बता
दो मैं इस जलती कलम से क्या लिखूं ??
कोयले की खान लिखूं या मनमोहन बेईमान लिखूं ?
पप्पू पर जोक लिखूं या मुल्ला मुलायम लिखूं ?
सी.बी.आई. बदनाम लिखूं या जस्टिस गांगुली महान लिखूं ?
शीला की विदाई लिखूं या लालू की रिहाई लिखूं
' आप ' की रामलीला लिखूं या कांग्रेस का प्यार लिखूं भ्रष्टतम्
सरकार लिखूँ या प्रशासन बेकार लिखू ?
महँगाई की मार लिखूं या गरीबो का बुरा हाल लिखू ?
भूखा इन्सान लिखूं या बिकता ईमान लिखूं ?
आत्महत्या करता किसान लिखूँ या शीश कटे जवान लिखूं ?
विधवा का विलाप लिखूँ , या अबला का चीत्कार लिखू ?
दिग्गी का'टंच माल ' लिखूं या करप्शन विकराल लिखूँ ?
अजन्मी बिटिया मारी जाती लिखू , या सयानी बिटिया ताड़ी
जाती लिखू ?
दहेज हत्या , शोषण , बलात्कार लिखू या टूटे हुए मंदिरों का हाल
लिखूँ ?
गद्दारों के हाथों में तलवार लिखूं या हो रहा भारत निर्माण
लिखूँ ?
जाति और सूबों में बंटा देश लिखूं या बीस दलो की लंगड़ी
सरकार लिखूँ ?
नेताओं का महंगा आहार लिखूं या 5 रुपये का थाल लिखूं ?
लोकतंत्र का बंटाधार लिखूं या पी.एम् . की कुर्सी पे मोदी का
नाम लिखूं ?
अब आप ही बता दो मैं इस जलती कलम से क्या लिखूं "
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