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इतनी शक्ती हमें देना दाता ( Give us so much strength )

  इतनी शक्ती हमें देना दाता  इतनी शक्ती हमें देना दाता  इतनी शक्ती हमें देना दाता ,  Sandeep Kumar मनका विश्वास कमजोर होना ,  हम चले नेक रस्तेपे हमसे ,  भूलकर भी कोई भूल होना ।धृ ।  दूर अज्ञान के हो अंधेरे  तू हमें ज्ञान की रोशनी दे  हर बुराई से बचते रहे हम  जितनी भी दे भली जिंदगी दे  बैर होना किसीका किसीसे  भावना मन में बदलेकी होना ॥१ ॥  हम ना सोचे हमें क्या मिला है  हम ये सोचे किया क्या है अर्पण  फूल खुशियोंके बॉटे सभीको  सब का जीवन ही बन जाये मधुबन  अपनी करुना का जलं तू बहाके  कर दे पावन हर एक मन का कोना । २ । Sandeep Kumar Youtube visit

Deal with anger in hindi

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                               ( क्रोध से निपटना )


 क्रोध ;  अप्रसन्नता , असंतुष्टि या शत्रुताभाव का एक प्रबल अहसास ।







क्रोध से निपटना


अनियंत्रित तनाव , हमारे लक्ष्यों की प्राप्ति में एक बड़ी रुकावट है - उसी तरह अनियंत्रित क्रोध भी । 

अप्रसन्नता असंतुष्टि या शत्रुताभाव का एक प्रबल अहसास क्रोध होता है , जो निराशा के परिणामस्वरूप होता है । 

क्रोध , एक सबसे बुनियादी मानवीय भावना है , जो व्यथित करने वाली परिस्थितियों में की जाने वाली सामान्य प्रतिक्रिया होती है । हालांकि ज्यादातर बार क्रोध वास्तव में हमारे लिए मददगार नहीं साबित होता । यह हमारी ऊर्जा खींच लेता है और हमें हमारे लक्ष्यों की राह से भटका देता है । 

जब हम क्रोधित होते हैं , तो हम असहाय , तथा और भी ज्यादा निराशा महसूस करते हैं ।



क्रोध की शुरुआत 


 • चिल्लाना , अपशब्द कहना , या अन्य गाली - गलौज करना 

 • शारीरिक दुर्व्यवहार

 • अतार्किक मांगें

 • दबंगई वाला व्यवहार

 • दूसरों की आलोचना और टीका - टिप्पणी 

 • दूसरों से शत्रुतापूर्ण असहमति

 • बदला लेने की काल्पनिक सोचें 

 • उपहास या कटुता

 • उपेक्षा या तिरस्कार 

 • “ चुप्पी " वाला रवैया 

 • खीझ 

 • दूसरों पर व्यापक रूप से अविश्वास • पीड़ित होने का अहसास 

 • ईर्ष्या या डाह 

 • थकावट और दुश्चिंता 

 • अवसाद


मैं क्यों क्रोधित हूं ?


आपको कौन बात क्रोधित करती है , और क्यों इसका पता लगाना , क्रोध को जीतने की दिशा में पहला कदम है ।

 डीलिंग विद एंगर की लेखिका सैंडी लिविंगस्टोन के अनुसार , क्रोध तब उत्पन्न होता है जब हमें ऐसा लगता है कि कुछ ऐसा घटने वाला है जो 

• हमें भयभीत करेगा

• हमें चोट पहुंचाएगा

• हमें खतरे में डालेगा 

• हमें शक्तिहीनता का अहसास कराएगा ।


हमें चोट या शक्तिहीनता का जो भय होता है वह प्रायः शारीरिक न होकर भावनात्मक होता है ।

 सारा का उदाहरण देखें : नवजात बच्चे , पार्ट - टाइम नौकरी , और मैनेजमेन्ट के नाइट कोर्स के बीच सारा को अपने तनाव स्तर काबू में रखने में कठिनाई होने लगी । 

बच्चा पैदा होने से पहले वह और उसका पति चक , बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी मिलकर उठाने के लिए राजी थे । 

एक शाम घर लौटने पर सारा ने देखा कि चक ने न तो बच्चे को नहलाया है न ही खाने के लिए कोई तैयारी की है ।

 भूखी और थकी होने पर अक्सर चिड़चिड़ी हो जाने वाली सारा अचानक फट पड़ी । 

चक भी क्रोधित हो उठा , उसने कहा कि सारा बेवजह बात को बढ़ा रही है ।

 इससे सारा का गुस्सा और भी बढ़ गया , क्योंकि इससे उसे भावनात्मक दुर्बलता का अहसास हुआ - चक उसकी भावनाओं को गंभीरता से नहीं ले रहा था । सारा के प्रति चक का क्रोध इस अहसास के डर से उपजा था कि शायद उनके रिश्ते में दरार आ चुकी है । 

उन दोनों के लिए इस समस्या का रचनात्मक हल यह होता कि वे अपने अहसास जाहिर करते और फिर मिलकर समाधान 

खोजते ।

 अपने निजी स्ट्रेसर्स की पहचान करने की तरह आपके निजी क्रोध को प्रेरित करने वाली बातों ( ट्रिगर्स ) जानना भी ज़रूरी है । ट्रिगर्स ऐसे लोग , परिस्थितियां या घटनाएं होते हैं जो क्रोध भड़काते हैं ।



शांत रहें


जब आप खुद को क्रोधित होता महसूस करें , तो शांत बने रहने पर केंद्रित हों । उदाहरण के लिए , यदि आप किसी दो साल के बच्चे की देखभाल करते हों और उसे सुलाने के लिए बिस्तर में लिटा आने के बाद जब आप कुछ पढ़ रहे हों और उसे बिस्तर से निकलकर आता देखें , तो ऐसे में आपकी अनेक प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं । 

एक यह भी हो सकती है कि आप क्रोधित हो उठें और कहें , “ यह बच्चा कभी भी शांत नहीं रहता ! " क्रोधित होकर आप बच्चे पर चिल्ला सकते हैं और फिर इतने दुखी हो जाएंगे कि अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं लगा पाएंगे । 

अन्य प्रतिक्रिया यह सोचने की हो सकती है , ' हम दोनों को आराम करने की ज़रूरत है । मैं एक विराम लूंगा और विस्तर में लेटकर कोई प्यारी कहानी पढूंगा ताकि हम दोनों एक साथ कुछ अच्छा समय बिता सकें । 

' बच्चे को फिर से बिस्तर पर लिटा आने के बाद आप शांत तथा अपने काबू में रह सकते हैं और अपने काम पर फिर से ध्यान लगा सकते हैं ।



महत्वपूर्ण बात 


 • परेशान करने वाली मामूली बातों से निबटें , इससे पहले कि वे क्रोध पैदा करने वाली परिस्थितियां बन जाएं ।

 • ज़रूरत होने पर मदद मांगें । 

 • अतार्किक आग्रह मानने से इनकार कर दें ।

 • आप अपने साथ जैसा व्यवहार चाहते हों , वैसा न मिलने पर अपनी बात कहें । 

 • ऐसा समाधान खोजें जिसमें हर किसी संबंधित व्यक्ति का हित हो । 

 • सकारात्मक , रचनात्मक आलोचनाओं और सुझावों का खुले मन से स्वागत करें । 

 • बधाईयों को सहज " धन्यवाद " के साथ स्वीकार करें , खुद को कमतर न साबित करें । 

 • शांत शारीरिक हाव - भाव बनाए रखें और नज़रें मिलाकर बात करें ।

 • सक्रिय होकर सुनने का अभ्यास करें : ऐसा जताएं कि आप सामने वाले की बात ध्यान से सुनना चाहते हैं , सामने वाले के शब्दों और शारीरिक हाव - भाव पर ध्यान दें , और उनके शब्दों पर विचार करें ताकि उनको लगे कि जो कुछ उन्होंने कहा है वह आपने सुना है ।



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