understanding of psychology
मनोविज्ञान की समझ
आप अपने जीवन में जो चाहते हैं उसके बारे में स्पष्ट सोच बनाने के लिए , आपको पहले खुद को समझना होगा । मैं कौन हूं ? मेरी इच्छाएं और जरूरतें क्या हैं ? मैं क्यों उस तरह से सोचता , महसूस करता और करता हूं ? ये प्रश्न , सफलता की यात्रा की शुरूआत में आते हैं । ये प्रश्न ऐसे कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न भी हैं जिनका समाधान मनोविज्ञान में किया जाता है । मनोविज्ञान , मानव व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन है ।
मनोविज्ञान ( साइकोलॉजी ) शब्द दो यूनानी शब्दों ' साइके ' जिसका अर्थ ' मन ' या स्वयं ' होता है और लोगस , जिसका अर्थ ' विज्ञान ' या ' अध्ययन ' होता है , से बना है ।
मनोविज्ञान , मानव व्यवहार पर केंद्रित है । व्यवहार वह है जो हम सोचते , महसूस करते . या करते हैं . इसमें निम्न शामिल हैं :
• कार्य करना
• प्रतिक्रिया देना
• बोलना
• समझना
• संवेदना महसूस करना
• कल्पना करना
• इच्छा करना
• याद करना
• सोना
• सपने देखना
मनोवैज्ञानिक , लोगों के व्यवहार का प्रेक्षण करके उनके बारे में सीखते हैं । यद्यपि मनोवैज्ञानिक इसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं माप सकते कि लोग क्या सोचते या कैसा महसूस करते हैं , लेकिन वे उनकी क्रियाएं देख सकते हैं ,
उनके शब्द सुन सकते हैं और उनके अनुभवों को समझने का प्रयास कर सकते हैं ।
मनोविज्ञान के लक्ष्य
मनोविज्ञान के चार प्रमुख लक्ष्य हैं : मानव व्यवहार का वर्णन करना पूर्वानुमान करना , स्पष्ट करना और ( कुछ मामलों में ) परिवर्तित करना ।
क्योंकि मानव व्यवहार काफी जटिल होता है . इसलिए अनेक मनोवैज्ञानिक इनमें से केवल एक या दो लक्ष्यों पर केंद्रित होते हैं । उदाहरण के लिए , कुछ मनोवैज्ञानिक इस प्रेक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हैं कि बहुत विशिष्ट परिस्थितियों में लोग किस तरह सोचते और कार्य करते हैं । फिर वे अपने प्रेक्षणों का उपयोग करके इन परिस्थितियों में मानव सोच और व्यवहार के आदर्श निर्मित करते हैं । उदाहरण के लिए , जो मनोवैज्ञानिक वैवाहिक संबंधों का अध्ययन करते हैं वे लोगों के वैवाहिक जीवनसाथी चयन को प्रभावित करने वाले कारकों की या समय के साथ वैवाहिक संबंधों में बदलाव के स्वरूपों की पड़ताल कर सकते हैं ।
अन्य मनोवैज्ञानिक यह समझने में रुचि रखते हैं कि किस तरह व्यक्ति और समूह सोचते और कार्य करते हैं , ताकि वे यह पूर्वानुमानित कर सकें कि उनके द्वारा भविष्य में किस प्रकार सोचने व कार्य करने की संभावना है ।
उदाहरण के लिए , बच्चों का अध्ययन करने वाले मनोवैज्ञानिक यह पूर्वानुमानित करने का प्रयास कर सकते हैं कि किन बच्चों के लिए अवसाद , तथा आत्म - प्रतिष्ठा में कमी जैसी समस्याओं के जोखिम रहेंगे ।
अनेक मनोवैज्ञानिक मनोविज्ञान के चौथे लक्ष्य पर केंद्रित होते हैं बदलता मानव व्यवहार उदाहरण के लिए नैदानिक मनोवैज्ञानिक ( क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट ) लोगों को मनोवैज्ञानिक रोगों से जुड़े अवांछनीय व्यवहार बदलने में मदद करते हैं सामाजिक परिस्थितियों से भयभीत होने वाले लोगों पर कार्य करने वाला क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट , इन लोगों को उनके भय का सामना करने तथा इससे छुटकारा पाने के लिए सकारात्मक कदम उठाने में मदद कर सकता है ।
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि वे डॉक्टरों की तरह दवाएं लिखकर अपने रोगियों की
समझ और भावना
विचार और अहसास वास्तव में क्या हैं ? विचार , जिसे मनोविज्ञान में समझ कहा जाता है . सूचनाएं प्रक्रिया करने के कार्य से संबंधित है । यह सूचना शब्दों , छवियों या ध्वनियों के रूप में हो सकती है । हर बार खुद से बात करते समय , दिवास्वप्न देखते समय अतीत का कोई घटना - चित्र मन में दोहराते समय हमारे दिमाग में कोई धुन सुनते समय , या हमारे दिमाग में कोई छवि देखते समय हम सोचते हैं । समझ में इस प्रकार की गतिविधियां शामिल हैं :
• समझना और बृझना - संवेदी सूचनाओं को अर्थ देना
• पहचान करना - इसकी पहचान करना कि आपने किसी विशेष व्यक्ति किया या नहीं । बात , विचार , या परिस्थिति का पहले अनुभव
• याव करना - सूचनाएं सहेजना और फिर से प्राप्त निजी विवरण 1.2 आपके विचार , अहसास और क्रियाए करना ।
• तर्कशक्ति - सूचनाओं का उपयोग करके
निष्कर्षो तक पहुंचना ।
• निर्णय करना - विविध विकल्पों , या क्रिया - विधियों का
मूल्यांकन करना और उनमें से चुनना ।
• समस्याएं हल करना - आप व आपके लक्ष्यों के बीच खड़ी
बाधाओं से निबटने के लिए तरीके खोजना और उनका मूल्यांकन करना ।
• अवधारणाएं बनाना - साझा विशेषताओं के आधार पर
वस्तुओं , घटनाओं , या लोगों को समूहों में बांटना ।
• दृष्टिगोचर ( विजुअलाइज़ ) करना - अपने इच्छित
व्यवहारों के विस्तृत मानसिक चित्र निर्मित करना ।



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